वाल्मीकि रामायण 2.97.3
पितु: सत्यं प्रतिश्रुत्य हत्वा भरतमागतम्।किं करिष्ऺयामि राज्येन सापवादेन लक्ष्मण॥
pitu: satyaṃ pratiśrutya hatvā bharatamāgatam |kiṃ kariṣऺyāmi rājyena sāpavādena lakṣmaṇa ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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