वाल्मीकि रामायण 2.99.39
बाष्पापिहितकण्ठश्च प्रेक्ष्य रामं यशस्विनम्।आर्येत्येवाथ संक्रुश्य व्याहर्त्तुं नाशकत्तदा॥
bāṣpāpihitakaṇṭhaśca prekṣya rāmaṃ yaśasvinam |āryetyevātha saṃkruśya vyāharttuṃ nāśakattadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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