वाल्मीकि रामायण 3.1.14
वैदेहीम् लक्ष्मणम् रामम् नेत्रैर् अनिमिषैर् इव ।आश्चर्य भूतान् ददृशुः सर्वे ते वन वासिनः॥
vaidehīm lakṣmaṇam rāmam netrair animiṣair iva |āścarya bhūtān dadṛśuḥ sarve te vana vāsinaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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