वाल्मीकि रामायण 3.10.20
अनुक्तेन अपि वैदेहि प्रतिज्ञाय कथम् पुनः ।मम स्नेहात् च सौहार्दात् इदम् उक्तम् त्वया वचः॥
anuktena api vaidehi pratijñāya katham punaḥ |mama snehāt ca sauhārdāt idam uktam tvayā vacaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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