वाल्मीकि रामायण 3.11.32
कुत्र आश्रम पदम् पुण्यम् महर्षेः तस्य धीमतः ।प्रसाद अर्थम् भगवतः सानुजः सह सीतया॥
kutra āśrama padam puṇyam maharṣeḥ tasya dhīmataḥ |prasāda artham bhagavataḥ sānujaḥ saha sītayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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