वाल्मीकि रामायण 3.11.5
ते गत्वा दूरम् अध्वानम् लंबमाने दिवाकरे ।ददृशुः सहिता रंयम् तटाकम् योजन आयुतम्॥
te gatvā dūram adhvānam laṃbamāne divākare |dadṛśuḥ sahitā raṃyam taṭākam yojana āyutam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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