वाल्मीकि रामायण 3.11.54
निगृह्य तरसा मृत्युम् लोकानाम् हित काम्यया ।यस्य भ्रात्रा कृता इयम् दिक् शरण्या पुण्य कर्मणा॥
nigṛhya tarasā mṛtyum lokānām hita kāmyayā |yasya bhrātrā kṛtā iyam dik śaraṇyā puṇya karmaṇā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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