वाल्मीकि रामायण 3.11.71
तस्याम् रात्र्याम् व्यतीतायाम् उदिते रवि मण्डले ।भ्रातरम् तम् अगस्त्यस्य आमंत्रयत राघवः॥
tasyām rātryām vyatītāyām udite ravi maṇḍale |bhrātaram tam agastyasya āmaṃtrayata rāghavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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