वाल्मीकि रामायण 3.14.10
प्रजापतेः तु दक्षस्य बभूवुर् इति विश्रुतम् ।षष्टिर् दुहितरो राम यशस्विन्यो महायशः॥
prajāpateḥ tu dakṣasya babhūvur iti viśrutam |ṣaṣṭir duhitaro rāma yaśasvinyo mahāyaśaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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