वाल्मीकि रामायण 3.14.13
पुत्रामः त्रैलोक्य भर्तॄन् वै जनयिष्यथ मत् समान् ।अदितिः तन् मना राम दितिः च दनुर् एव च॥
putrāmaḥ trailokya bhartṝn vai janayiṣyatha mat samān |aditiḥ tan manā rāma ditiḥ ca danur eva ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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