वाल्मीकि रामायण 3.14.20
चक्रवाकाम् च भद्रम् ते विजज्ञे सा अपि भामिनी ।शुकी नताम् विजज्ञे तु नताया विनता सुता॥
cakravākām ca bhadram te vijajñe sā api bhāminī |śukī natām vijajñe tu natāyā vinatā sutā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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