वाल्मीकि रामायण 3.14.26
मातंग्याः तु अथ मातन्गाअपत्यम् मनुज ऋषभ ।दिशागजम् तु श्वेत काकुत्स्थ श्वेता व्यजनयत् सुतम्॥
mātaṃgyāḥ tu atha mātangāapatyam manuja ṛṣabha |diśāgajam tu śveta kākutstha śvetā vyajanayat sutam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें