वाल्मीकि रामायण 3.15.9
स तम् रुचिरम् आक्रम्य देशम् आश्रम कर्मणि ।हस्ते गृहीत्वा हस्तेन रामः सौमित्रिम् अब्रवीत्॥
sa tam ruciram ākramya deśam āśrama karmaṇi |haste gṛhītvā hastena rāmaḥ saumitrim abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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