वाल्मीकि रामायण 3.2.9
अभ्य धावत् सुसंक्रुद्धो प्रजाः काल इव अन्तकः ।स कृत्वा भैरवम् नादम् चालयन् इव मेदिनीम्॥
abhya dhāvat susaṃkruddho prajāḥ kāla iva antakaḥ |sa kṛtvā bhairavam nādam cālayan iva medinīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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