वाल्मीकि रामायण 3.23.2
निपेतुः तुरगाः तस्य रथ युक्ता महाजवाः ।समे पुष्पचिते देशे राजमार्गे यदृच्छया॥
nipetuḥ turagāḥ tasya ratha yuktā mahājavāḥ |same puṣpacite deśe rājamārge yadṛcchayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें