वाल्मीकि रामायण 3.23.3
श्यामम् रुधिर पर्यन्तम् बभूव परिवेषणम् ।अलात चक्र प्रतिमम् प्रतिगृह्य दिवाकरम्॥
śyāmam rudhira paryantam babhūva pariveṣaṇam |alāta cakra pratimam pratigṛhya divākaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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