वाल्मीकि रामायण 3.23.4
ततो ध्वजम् उपागम्य हेम दण्डम् समुच्छ्रितम् ।समाक्रम्य महाकायः तस्थौ गृध्रः सुदारुणः॥
tato dhvajam upāgamya hema daṇḍam samucchritam |samākramya mahākāyaḥ tasthau gṛdhraḥ sudāruṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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