वाल्मीकि रामायण 3.32.20
हविर्धानेषु यः सोमम् उपहन्ति महाबलः ।प्राप्त यज्ञ हरम् दुष्टम् ब्रह्म घ्नम् क्रूर कारिणम्॥
havirdhāneṣu yaḥ somam upahanti mahābalaḥ |prāpta yajña haram duṣṭam brahma ghnam krūra kāriṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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