वाल्मीकि रामायण 3.35.5
एवम् उक्तः क्षणेन एव सारथिः लघु विक्रमः ।रथम् संयोजयामास तस्य अभिमतम् उत्तमम्॥
evam uktaḥ kṣaṇena eva sārathiḥ laghu vikramaḥ |ratham saṃyojayāmāsa tasya abhimatam uttamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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