वाल्मीकि रामायण 3.4.3
माम् ऋका भक्ष इष्यन्ति शार्दूल द्वीपिनः तथा ।माम् हरः उत्सृज्य काकुत्स्थौ नमस्ते राक्षसोत्तमः॥
mām ṛkā bhakṣa iṣyanti śārdūla dvīpinaḥ tathā |mām haraḥ utsṛjya kākutsthau namaste rākṣasottamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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