वाल्मीकि रामायण 3.42.7
आरुह्यताम् शीघ्रम् खगो रत्न विभूषितः ।मया सह रथो युक्तः पिशाच वदनैः खरैः॥
āruhyatām śīghram khago ratna vibhūṣitaḥ |mayā saha ratho yuktaḥ piśāca vadanaiḥ kharaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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