वाल्मीकि रामायण 3.45.11
अशक्यः तव वैदेही भर्ता जेतुम् न संशयः ।देवि देव मनुष्येषु गन्धर्वेषु पतत्रिषु॥
aśakyaḥ tava vaidehī bhartā jetum na saṃśayaḥ |devi deva manuṣyeṣu gandharveṣu patatriṣu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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