वाल्मीकि रामायण 3.45.35
लक्ष्मणेन एवम् उक्ता तु रुदती जनकाअत्मजा ।प्रत्युवाच ततो वाक्यम् तीव्रम् बाष्प परिप्लुता॥
lakṣmaṇena evam uktā tu rudatī janakāatmajā |pratyuvāca tato vākyam tīvram bāṣpa pariplutā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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