वाल्मीकि रामायण 3.5.37
इमाम् मन्दाकिनीम् राम प्रतिस्रोतम् अनुव्रज ।नदीम् पुष्पोडुप वहाम् ततः तत्र गमिष्यसि॥
imām mandākinīm rāma pratisrotam anuvraja |nadīm puṣpoḍupa vahām tataḥ tatra gamiṣyasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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