वाल्मीकि रामायण 3.5.4
तस्य देव प्रभावस्य तपसा भावित आत्मनः ।समीपे शरभंगस्य ददर्श महत् अद्भुतम्॥
tasya deva prabhāvasya tapasā bhāvita ātmanaḥ |samīpe śarabhaṃgasya dadarśa mahat adbhutam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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