वाल्मीकि रामायण 3.50.26
न हि मे जीवमानस्य नयिष्यसि शुभाम् इमाम् ।सीताम् कमल पत्र अक्षीम् रामस्य महषीम् प्रियाम्॥
na hi me jīvamānasya nayiṣyasi śubhām imām |sītām kamala patra akṣīm rāmasya mahaṣīm priyām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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