वाल्मीकि रामायण 3.50.7
रक्षणीया विशेषेण राज दारा महाबलः ।निवर्तय गतिम् नीचाम् पर दार अभिमर्शनात्॥
rakṣaṇīyā viśeṣeṇa rāja dārā mahābalaḥ |nivartaya gatim nīcām para dāra abhimarśanāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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