वाल्मीकि रामायण 3.51.32
पाप अनुबंधो वै यस्य कर्मणः को नु तत् पुमान् ।कुर्वीत लोक अधिपतिः स्वयंभूः भगवान् अपि॥
pāpa anubaṃdho vai yasya karmaṇaḥ ko nu tat pumān |kurvīta loka adhipatiḥ svayaṃbhūḥ bhagavān api ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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