वाल्मीकि रामायण 3.51.39
संच्छिन्न बाहोः सद्यो वै बाहवः सहसा अभवन् ।विष ज्वालावली युक्ता वल्मीकत् इव पन्नगाः॥
saṃcchinna bāhoḥ sadyo vai bāhavaḥ sahasā abhavan |viṣa jvālāvalī yuktā valmīkat iva pannagāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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