वाल्मीकि रामायण 3.52.2
निमित्तम् लक्षणम् स्वप्नम् शकुनि स्वर दर्शनम् ।अवश्यम् सुख दुःखेषु नराणाम् परिदृश्यते॥
nimittam lakṣaṇam svapnam śakuni svara darśanam |avaśyam sukha duḥkheṣu narāṇām paridṛśyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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