वाल्मीकि रामायण 3.61.17
जिज्ञासमाना वैदेही त्वाम् माम् च पुरुषर्षभ ।तस्या हि अन्वेषणे श्रीमन् क्षिप्रम् एव यतावहे॥
jijñāsamānā vaidehī tvām mām ca puruṣarṣabha |tasyā hi anveṣaṇe śrīman kṣipram eva yatāvahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें