वाल्मीकि रामायण 3.62.16
न तु अहम् ताम् विना सीताम् जीवेयम् हि कथंचन ।गाढम् आश्लिष्य भरतो वाच्यो मत् वचनात् त्वया॥
na tu aham tām vinā sītām jīveyam hi kathaṃcana |gāḍham āśliṣya bharato vācyo mat vacanāt tvayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें