वाल्मीकि रामायण 3.64.40
तप्त बिन्दु निकाशैः च चित्रैः क्षतज बिन्दुभिः ।आवृतम् पश्य सौमित्रे सर्वतो धरणी तलम्॥
tapta bindu nikāśaiḥ ca citraiḥ kṣataja bindubhiḥ |āvṛtam paśya saumitre sarvato dharaṇī talam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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