वाल्मीकि रामायण 3.64.6
रामः समभिचक्राम स्वयम् गोदावरीम् नदीम् ।स ताम् उपस्थितो रामः क्व सीते इति एवम् अब्रवीत्॥
rāmaḥ samabhicakrāma svayam godāvarīm nadīm |sa tām upasthito rāmaḥ kva sīte iti evam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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