वाल्मीकि रामायण 3.68.1
रामः प्रेक्ष्य तु तम् गृध्रम् भुवि रौद्रेण पातितम् ।सौमित्रिम् मित्र संपन्नम् इदम् वचनम् अब्रवीत्॥
rāmaḥ prekṣya tu tam gṛdhram bhuvi raudreṇa pātitam |saumitrim mitra saṃpannam idam vacanam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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