वाल्मीकि रामायण 3.69.33
स्थितम् आवृत्य पन्थानम् तयोः भ्रात्रोः प्रपन्नयोः ।अथ तम् समतिक्रम्य क्रोश मात्रम् ददर्शतुः॥
sthitam āvṛtya panthānam tayoḥ bhrātroḥ prapannayoḥ |atha tam samatikramya krośa mātram dadarśatuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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