वाल्मीकि रामायण 3.73.35
तत्र अपि शिशु नागानाम् आक्रंदः श्रूयते महान् ।क्रीडताम् राम पंपायाम् मतंग आश्रम वासिनाम्॥
tatra api śiśu nāgānām ākraṃdaḥ śrūyate mahān |krīḍatām rāma paṃpāyām mataṃga āśrama vāsinām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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