वाल्मीकि रामायण 3.75.2
चिंतयित्वा तु धर्मात्मा प्रभावम् तम् महात्मनाम् ।हित कारिणम् एक अग्रम् लक्ष्मणम् राघवो अब्रवीत्॥
ciṃtayitvā tu dharmātmā prabhāvam tam mahātmanām |hita kāriṇam eka agram lakṣmaṇam rāghavo abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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