वाल्मीकि रामायण 4.10.14
माम् समाह्वयत क्रुद्धो युद्ध कांक्षी तदा पुरा ।तस्य तद् भाषितम् श्रुत्वा निःसृतः अहम् नृपाअलयात्॥
mām samāhvayata kruddho yuddha kāṃkṣī tadā purā |tasya tad bhāṣitam śrutvā niḥsṛtaḥ aham nṛpāalayāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें