वाल्मीकि रामायण 4.12.16
तम् श्रुत्वा निनदम् भ्रातुः क्रुद्धो वाली महाबलः ।निष्पपात सुसंरब्धो भास्करो अस्त तटात् इव॥
tam śrutvā ninadam bhrātuḥ kruddho vālī mahābalaḥ |niṣpapāta susaṃrabdho bhāskaro asta taṭāt iva ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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