वाल्मीकि रामायण 4.12.19
ततो रामो धनुष् पाणिः तौ उभौ समुदैक्षत ।अन्योन्य सदृशौ वीरौ उभौ देवौ इव अश्विनौ॥
tato rāmo dhanuṣ pāṇiḥ tau ubhau samudaikṣata |anyonya sadṛśau vīrau ubhau devau iva aśvinau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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