वाल्मीकि रामायण 4.12.20
यत् न अवगच्छत् सुग्रीवम् वालिनम् वा अपि राघवः ।ततो न कृतवान् बुद्धिम् मोक्तुम् अन्तकरम् शरम्॥
yat na avagacchat sugrīvam vālinam vā api rāghavaḥ |tato na kṛtavān buddhim moktum antakaram śaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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