वाल्मीकि रामायण 4.12.32
ततो अहम् रूप सादृश्यात् मोहितो वानरोत्तम ।न उत्सृजामि महावेगम् शरम् शत्रु निबर्हणम्॥
tato aham rūpa sādṛśyāt mohito vānarottama |na utsṛjāmi mahāvegam śaram śatru nibarhaṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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