वाल्मीकि रामायण 4.12.39
गज पुष्पीम् इमाम् फुल्लाम् उत्पाट्य शुभ लक्षणाम् ।कुरु लक्ष्मण कण्ठे अस्य सुग्रीवस्य महात्मनः॥
gaja puṣpīm imām phullām utpāṭya śubha lakṣaṇām |kuru lakṣmaṇa kaṇṭhe asya sugrīvasya mahātmanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें