वाल्मीकि रामायण 4.12.8
स इन्द्रान् अपि सुरान् सर्वाम् त्वम् बाणैः पुरुषर्षभ ।समर्थः समरे हन्तुम् किम् पुनर् वालिनम् प्रभो॥
sa indrān api surān sarvām tvam bāṇaiḥ puruṣarṣabha |samarthaḥ samare hantum kim punar vālinam prabho ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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