वाल्मीकि रामायण 4.13.26
प्रणमन्ति हि ये तेषाम् ऋषीणाम् भावित आत्मनाम् ।न तेषाम् अशुभम् किंचित् शरीरे राम दृश्यते॥
praṇamanti hi ye teṣām ṛṣīṇām bhāvita ātmanām |na teṣām aśubham kiṃcit śarīre rāma dṛśyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें