वाल्मीकि रामायण 4.13.4
पृष्ठतो हनुमान् वीरो नलो नीलः च वीर्यवान् ।तारः चैव महातेजा हरि यूथप यूथपाः॥
pṛṣṭhato hanumān vīro nalo nīlaḥ ca vīryavān |tāraḥ caiva mahātejā hari yūthapa yūthapāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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