वाल्मीकि रामायण 4.14.14
ततो वेत्सि बलेन अद्य वालिनम् निहतम् मया ।अनृतम् न उक्त पूर्वम् मे चिरम् कृच्छ्रे अपि तिष्ठता॥
tato vetsi balena adya vālinam nihatam mayā |anṛtam na ukta pūrvam me ciram kṛcchre api tiṣṭhatā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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