वाल्मीकि रामायण 4.14.2
विसार्य सर्वतो दृष्टिम् कानने कानन प्रियः ।सुग्रीवो विपुल ग्रीवः क्रोधम् आहारयद् भृशम्॥
visārya sarvato dṛṣṭim kānane kānana priyaḥ |sugrīvo vipula grīvaḥ krodham āhārayad bhṛśam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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