वाल्मीकि रामायण 4.14.4
गर्जन् इव महामेघो वायु वेग पुरस्सरः ।अथ बालार्क सदृशो दृप्त सिम्ह गतिः ततः॥
garjan iva mahāmegho vāyu vega purassaraḥ |atha bālārka sadṛśo dṛpta simha gatiḥ tataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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